
जशपुर। क्षेत्र में पिछले करीब 15 दशकों से भगवान श्री जगन्नाथ का देव स्नान महोत्सव श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है।सोमवार को आयोजित देव स्नान पर्व में भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को मंदिर से बाहर लाकर सार्वजनिक रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाभिषेक कराया गया। गंगाजल, दूध, पंचामृत, चंदन, इत्र, पुष्प और 108 पवित्र कलशों के जल से भगवान का दिव्य स्नान कराया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण छा गया।स्नान के बाद भगवान होंगे अनासार, 15 दिनों तक बंद रहेंगे मंदिर के पटधार्मिक मान्यता के अनुसार देव स्नान के बाद भगवान को “देवज्वर” हो जाता है। मंदिर के पुरोहित नरेन्द्र षंडगी ने बताया कि भगवान को पंचमुली एवं दशमुली औषधियों से उपचार दिया जाएगा। इस अवधि में भगवान विश्राम करेंगे और करीब 15 दिनों तक मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रहेंगे।नेत्रोत्सव के बाद होगा दिव्य दर्शनविश्राम अवधि पूरी होने के बाद 15 जुलाई को भव्य नेत्रोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान के नेत्रों का पुनः अंकन कर सोलह श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद भक्तों को भगवान के नवयौवन स्वरूप के दर्शन होंगे और रथयात्रा महापर्व की अंतिम तैयारियां पूरी की जाएंगी।रथयात्रा में मौसी घर जाएंगे भगवानआषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर मौसी घर (गुंडीचा मंदिर) की यात्रा करेंगे। वहां कुछ दिनों के प्रवास के बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी को पुनः श्रीमंदिर लौटेंगे। इसके साथ ही नियमित पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ होगा।क्षेत्रभर में श्रद्धा का उमड़ा सैलाबअंकिरा,दोकड़ा, लवाकेरा, तपकरा, तामामुंडा, कोल्हेनझरिया सहित विकासखंड के सभी जगन्नाथ मंदिरों में देव स्नान पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। विशेष रूप से दोकड़ा धाम में कई दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुसार 108 पवित्र कलशों से भगवान का महाभिषेक किया गया। महाप्रसाद एवं भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
