
जशपुर। विकासखंड फरसाबहार के प्रमुख व्यापारिक नगर तपकरा में हल्की बारिश ने ही व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। कुनकुरी–तपकरा स्टेट हाईवे मार्ग पर स्थित तपकरा क्षेत्र में नालों के बंद हो जाने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर जा रहा है, जिससे पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। हालात यह हैं कि थोड़ी सी बारिश में ही मुख्य बस्ती की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं और लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।तपकरा नगर की यह मुख्य सड़क न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए बल्कि आसपास के कई गांवों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। इसी मार्ग से लोग रोजमर्रा के काम, बाजार, स्कूल, अस्पताल और तहसील कार्यालय तक पहुंचते हैं। लेकिन जलभराव के कारण लोगों को घुटनों तक पानी में चलकर आना-जाना पड़ रहा है, जिससे खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।इस मार्ग का धार्मिक महत्व भी काफी अधिक है, क्योंकि इसी रास्ते पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में उन्हें पानी से भरी सड़क पार कर मंदिर जाना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।प्रशासनिक दृष्टि से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी सड़क से विकासखंड और जिला स्तर के अधिकारियों का नियमित आवागमन होता है। तपकरा के तहसील मुख्यालय बनने के बाद यहां की आवाजाही और बढ़ गई है। करीब 20 से 25 गांवों के ग्रामीण इसी मार्ग पर निर्भर हैं, वहीं ओडिशा और झारखंड सीमा से जुड़े यात्रियों का भी लगातार आना-जाना बना रहता है।इसी बीच एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत गुरुवार से विकासखंड के मुख्य ग्राम में “सुशासन तिहार” कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उनका त्वरित निराकरण किया जाना है। ऐसे में तपकरा की यह गंभीर जलभराव समस्या प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी है।जलभराव की समस्या अब स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनती जा रही है। सड़क और घरों के आसपास जमा गंदे पानी में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नालों की सफाई नहीं की गई है, जिसके कारण पानी निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है।ग्रामीणों ने बताया कि कई बार इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है, जिसके कारण हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है।अब जबकि “सुशासन तिहार” की शुरुआत होने जा रही है, ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी समस्या को प्राथमिकता से सुना जाएगा और जल्द से जल्द नालों की सफाई व स्थायी जल निकासी की व्यवस्था कर राहत दी जाएगी।
