सर्पों को मारने के बजाय सुरक्षित रेस्क्यू का संदेश, विशेषज्ञों ने कहा—सर्पदंश में झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल जाएं

जशपुर। नागपंचमी के अवसर पर तपकरा में नागपंचमी महोत्सव एवं सर्प जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन उत्साह और गरिमामय वातावरण में किया गया। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और मानव-सर्प सहअस्तित्व का संदेश देते हुए आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सर्प विशेषज्ञों, सर्प मित्रों, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, ग्रामीणों और स्कूली विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान शिव एवं नाग देवता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ राज्य गीत के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। अतिथि देवो भवः की परंपरा का निर्वहन करते हुए सभी विशिष्ट अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।कार्यक्रम में सर्प विशेषज्ञों ने सर्पों से जुड़े मिथकों और वास्तविक तथ्यों, सर्पों की पहचान, सर्प संरक्षण एवं सुरक्षित रेस्क्यू जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि सर्प पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें भय या अंधविश्वास के कारण मारने के बजाय प्रशिक्षित सर्प मित्रों की सहायता से सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना चाहिए।बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, क्विज और चित्रकला प्रतियोगिता में लिया हिस्सामहोत्सव के दौरान स्कूली बच्चों के लिए क्विज एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सर्प संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर अपनी समझ और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं प्रशस्ति प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।सर्पदंश पर झाड़-फूंक नहीं, तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपीलकार्यक्रम में सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक सावधानियों को लेकर भी ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तत्काल नजदीकी चिकित्सा केंद्र पहुंचाना चाहिए। समय पर चिकित्सा उपचार ही सर्पदंश की स्थिति में जीवन बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।कार्यक्रम में पूर्व संसदीय सचिव भरत साय, सर्प विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. अजय शर्मा, जनपद सदस्य अनिल यादव, उप सरपंच तपकरा अजय गुप्ता, जिला संयोजक शिक्षा प्रकोष्ठ रामनिवास गुप्ता, आयुष्मान शर्मा, निरंजन प्रसाद गुप्ता, अविनाश कुमार कोरबा, सुश्री दलजीत कौर, लक्ष्मण गुप्ता एवं लक्ष्मण साव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।इसके अलावा उप वन मंडलाधिकारी कुनकुरी आशीष आर्य, परिक्षेत्राधिकारी प्रवीण वर्मा सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, सर्प मित्र, ग्रामीणजन और बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी मौजूद रहे।नागपंचमी महोत्सव ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था को सर्प संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जोड़ते हुए समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—सर्पों से डरने या उन्हें मारने के बजाय उन्हें समझें, सुरक्षित रखें और मानव-सर्प सहअस्तित्व की दिशा में कदम बढ़ाएं।अतिथियों, विशेषज्ञों, वन विभाग, सर्प मित्रों, ग्रामीणों और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम सफल, सार्थक एवं प्रेरणादायी रूप से संपन्न हुआ।





