कुपाकानी से बरडीह तक जोखिम भरे प्वाइंट, ओडिशा-झारखंड को जोड़ने वाली जीवन रेखा पर सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
लावाकेरा लैलूंगा स्टेट हाईवे बना ‘खतरे का रास्ता’, 44 किमी में 6 संकीर्ण पुलिया—हर दिन हादसों का डर

जशपुर। लावाकेरा – लैलूंगा स्टेट हाईवे मार्ग पर सफर करना अब वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा होता जा रहा है। यह सड़क जहां एक ओर जशपुर और रायगढ़ जिले को जोड़ती है, वहीं दूसरी ओर ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच आवागमन की अहम कड़ी भी है। इसके बावजूद 44 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में 6 ऐसे संकीर्ण पुल और पुलिया मौजूद हैं, जो हर दिन दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कुपाकानी, फिटिगपारा, गझियाडीह, खुटसेरा, बरडीह और सराइटोली जैसे स्थानों पर बने पुल अत्यंत संकीर्ण हैं। इन जगहों पर दो बड़े वाहनों का एक साथ गुजरना मुश्किल हो जाता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनती है और हल्की सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि इन पुलों पर न तो पर्याप्त चौड़ाई है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। कई जगहों पर रेलिंग भी जर्जर स्थिति में है, जिससे रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। बरडीह स्थित कोकसारा पुलिया तो पहले से ही दुर्घटनाओं के लिए बदनाम रहा है, जहां आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं।
इसी बीच सरईटोली पुलिया को लेकर राहत भरी खबर भी सामने आई है। यहां लंबे समय से हो रही दुर्घटनाओं और आवागमन की समस्या को देखते हुए उच्च स्तरीय पुलिया का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पुलिया निर्माण को तत्काल स्वीकृति दी, जिसके बाद अब कार्य तेजी से जारी है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इसके बन जाने से इस मार्ग पर दुर्घटनाओं में कमी आएगी और आवागमन सुगम होगा।
मांग तेज:
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से शेष खतरनाक प्वाइंट्स का भी जल्द सर्वे कर पुलों का चौड़ीकरण कराने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है, ताकि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यात्रा सुरक्षित हो सके।
