
जशपुर। कासाबेल विकासखंड के ग्राम बगिया में संचालित समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना किसानों के लिए बड़ी सौगात साबित होने जा रही है। मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना का बुधवार को कलेक्टर रोहित व्यास ने निरीक्षण किया। वर्तमान में परियोजना के प्रारंभिक चरण में ले-आउट एवं खुदाई कार्य तेजी से जारी है।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को निर्देशित करते हुए कहा कि परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में सभी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक एवं नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर तैयार की जा रही यह योजना भविष्य में आदर्श सिंचाई मॉडल के रूप में स्थापित होगी और क्षेत्र के किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।पारंपरिक नहर नहीं, पाइपलाइन से पहुंचेगा खेतों तक पानीइस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक खुली नहर प्रणाली के बजाय आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके तहत जमीन के भीतर पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे पानी की बर्बादी कम होगी और जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही भूमि अधिग्रहण की समस्या भी नहीं आएगी।अब तक क्षेत्र के अधिकांश किसान बारिश आधारित खेती पर निर्भर थे। गर्मी और कम बारिश के दौरान खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाने से उत्पादन प्रभावित होता था। लेकिन इस योजना के शुरू होने के बाद किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सकेगी, जिससे खेती का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।प्रदेश का एकमात्र बगिया क्लस्टरअधिकारियों के अनुसार देश के 23 राज्यों में कुल 34 योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ का एकमात्र बगिया क्लस्टर शामिल है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है, जबकि योजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।13 गांवों के हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभपरियोजना के अंतर्गत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 ग्रामों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इससे हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।परियोजना का उद्देश्य हर बूंद पानी का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना, जल उपयोग दक्षता बढ़ाना तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि कर किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है।सौर ऊर्जा और स्मार्ट तकनीक का होगा इस्तेमालइस योजना में बिजली आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा, जिससे ऊर्जा खर्च में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही जल प्रबंधन के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन (SCADA) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।डेटा आधारित इस प्रणाली के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कब और कितनी मात्रा में पानी पहुंचाना है। इससे पानी की अनावश्यक बर्बादी रुकेगी और किसानों को जरूरत के अनुसार समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।किसानों की भागीदारी से होगा संचालनपरियोजना के संचालन और जल प्रबंधन व्यवस्था में किसानों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर सिंचाई व्यवस्था और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी। इससे लंबे समय में खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, किसानों की आय मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
