मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को दिये निर्देश जिससे अब हुई गांव में रोशनी
ग्रामीणों ने जताया आभार गांव में बिजली पहुंचने पर कादोदरह के ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का समाधान होने से उनके जीवन में नई रोशनी आई है और अब गांव विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
जशपुर। विकास खंड फरसाबहार के ग्राम पंचायत बाबूसाजबहार अंतर्गत कादोदरह गांव में आखिरकार 12 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद बिजली पहुंच गई है। जैसे ही गांव में बिजली सप्लाई शुरू हुई, पूरे गांव का माहौल खुशी और उत्साह से भर गया। वर्षों से अंधेरे में जीवन यापन कर रहे ग्रामीणों के घर अब रोशनी से जगमगा उठे हैं।जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में कादोदरह गांव में बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से खंभे तो स्थापित कर दिए गए थे, लेकिन इसके बाद कार्य अधूरा ही छोड़ दिया गया। बिजली तार नहीं खींचे जाने और ट्रांसफार्मर नहीं लगाए जाने के कारण गांव के लोग बिजली सुविधा से वंचित रहे। इस दौरान ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।रात होते ही गांव अंधेरे में डूब जाता था, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को काफी दिक्कत होती थी। स्कूली बच्चे लालटेन और ढिबरी के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर थे, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। वहीं किसानों को सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिलने के कारण वे आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ नहीं उठा पा रहे थे और उनकी आय भी सीमित थी।इस गंभीर समस्या को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पहल की।सरपंच संजय भगत, मंडल अध्यक्ष दिलीप साहू, जिला किसान मोर्चा महामंत्री कपिलेश्वर सिंह तथा जिला भाजपा कोषाध्यक्ष नटवर मूंदड़ा सहित अन्य प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष प्रमुखता से उठाया।मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए, जिसके बाद संबंधित विभाग ने तेजी से कार्य करते हुए गांव में बिजली तार खींचने और ट्रांसफार्मर स्थापित करने का कार्य पूरा किया। कुछ ही समय में अधूरा पड़ा काम पूर्ण कर दिया गया और कादोदरह गांव को विद्युत आपूर्ति से जोड़ दिया गया।बिजली आने के बाद गांव में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ग्रामीणों को अंधेरे में रहने की मजबूरी से मुक्ति मिल गई है। घरों में पंखे, बल्ब और अन्य विद्युत उपकरण चलने लगे हैं, जिससे जीवन स्तर में सुधार हुआ है।किसानों के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है। अब वे बिजली के माध्यम से सिंचाई कर गर्मी के मौसम में भी फसल ले सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।वहीं बच्चों के लिए भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। अब उन्हें पढ़ाई के लिए लालटेन या ढिबरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि उजाले में बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।
