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जशपुर चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन से ही पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। गांव-गांव में माता की भक्ति में श्रद्धालु लीन नजर आ रहे हैं। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग रही हैं, जहां श्रद्धालु माता के दरबार में हाजिरी लगाकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।नवरात्रि के इस पावन अवसर पर क्षेत्र में जगह-जगह भजन-कीर्तन, जस-गीत और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे पूरा इलाका आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है। श्रद्धालुओं द्वारा अपने-अपने घरों में घट स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जिससे विशेष रौनक देखने को मिल रही है। सुबह और शाम की आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हो रहे हैं और “जय माता दी” के जयकारों से वातावरण गूंज उठता है।
गंझियाडिह दुर्गा मंदिर में निकली भव्य कलश यात्रा
जिले में माता की नगरी के रूप में प्रसिद्ध गंझियाडिह दुर्गा मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। मंदिर के पुजारी मनीष शास्त्री द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर कलश यात्रा का शुभारंभ कराया गया।कलश यात्रा में श्रद्धालु सिर पर कलश रखकर गांव का भ्रमण करते हुए मंदिर पहुंचे। इस दौरान “जय माता दी” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। नवरात्रि के दौरान यहां प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।षष्ठी तिथि को मां वन भोरी का विशेष पूजन, महाआरती एवं रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भजन मंडलियों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। अष्टमी के दिन यहां “फूलों की होली” का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित फरसाबहार, तपकरा, केरसई, लावाकेरा, कोल्हेंझरिया, भेलवा, अंकिरा, कोतबा, लैलूंगा, बागबहार, लुड़ेग और पत्थलगांव सहित ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसके साथ ही नव कन्या श्रृंगार दर्शन, छप्पन भोग और विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
कुचमुण्डा काली मंदिर में विशेष तैयारीकुचमुण्डा काली मंदिर में भी इस वर्ष विशेष तैयारियां की गई हैं। पुजारी शिवाराम बाबा द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। यह मंदिर ओडिशा और झारखंड सहित अन्य राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।यहां श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और पूर्ण होने पर चुनरी, नारियल व प्रसाद अर्पित करते हैं। हर वर्ष यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है।गायत्री परिवार द्वारा रोजाना हवन-पूजननवरात्रि के अवसर पर क्षेत्र में गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। प्रतिदिन विधि-विधान से हवन-यज्ञ किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।हवन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। श्रद्धालु आहुति देकर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। साथ ही हवन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश भी दिया जा रहा है।गायत्री परिवार के सदस्यों के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों तक यह हवन-यज्ञ लगातार जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन अलग-अलग परिवारों की सहभागिता हो रही है। इससे लोगों में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता भी मजबूत हो रही है।समापननवरात्रि के इस पावन पर्व पर पूरा अंकिरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ है। हर ओर माता के जयकारे गूंज रहे हैं और श्रद्धालु पूरे उत्साह एवं उल्लास के साथ इस पर्व को मना रहे हैं।
